दुनिया की अपनी रीति है और मेरी अपनी है
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पर जाने क्यूँ मुझे दुनिया की बातों पर चलना पड्ता है .
पर जाने क्यूँ मुझे दुनिया की बातों पर चलना पड्ता है .
अब चाहे मुझे अपने अहं को मारना पड्ता है .
बुरा लगता है हर बार पर क्या करू करना पड्ता है .
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चलो सोने चलता हू कल फिर मिलता हू ...
चलो सोने चलता हू कल फिर मिलता हू ...
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